सांझ की नीरवता में , खामोशियों में

सिर्फ तुम्हारे साथ से

चहक उठता है ये कौतुहल मन

तुम्हारा स्पर्श

तुम्हारें ख्यालों का उत्कर्ष

हसरत भरी नज़रों का आमंत्रण

वो प्यार भरी नज़रों का प्रण

सभी कुछ तो सिमटे हुए है

वक़्त के पन्नो में