'माँगे हैं!'
तुतलाकर किस भोलेपन से
क्या- क्या सलमा माँगे हैं?
पहले एक रोटी का टुकड़ा
बाद में गुड़िया माँगे हैं !
मंदिर-मस्जिद द्वारे पर
अक्सर एक बेचारी विधवा रोकर
धर्म के इन ठेकेदारो से
अपना बेटा माँगे हैं !
देखो वो छोटी-सी बिटिया
अपने सर्व्हारे पिता से
पीली चूड़ी, पीला- कुरता
लाल दुपट्टा माँगे हैं !
लोधी की बेटी ने
सोलहवा साल जो पार किया
गाँव का बूढ़ा धन्नू मुखिया
उससे रिश्ता माँगे हैं !
लाला ने घर आकर
हाल न कुछ बीमार का पूछा
घर के द्वार से ही देखो
अपना कर्ज़ा माँगे हैं !
रोज़ बदलते रंगों को देख
दर्पण भी अब ऊब चूका हैं
क्यूंकि अब तो साहिल भी दरिया से
फूल- किनारा माँगे हैं !
-मनीष गोस्वामी