मज़हबी रंग वो पेड़..... जो वर्षों से साथ खड़े थे ना जाने कितने ही वसंत- पतझड़ उन्होंने साथ जिया हर सुख- दुःख में वे एक दूसरे के साथी रहे। पर कल आई एक छोटी-सी आँधी ने उन्हें उजाड़ दिया। सुना है.... वो पेड़ मजहबी हो गए थे, उनका मज़हब ही अब उनके लिए सब कुछ बन गया था हर रिश्ते से बड़ा.... उनमें अपने मजहब को श्रेष्ठ दिखाने की होड़ लग गयी थी..