तुम्हारी पेशानी पे उड़ती ज़ुल्फ़ देख कर मेरा दिल भी धड़क लिया करता था तुम्हारी मोहब्बत की कहानी सुन कर मेरा दिल भी धड़क लिया करता था ये बातें गुज़रे ज़माने हुई मेरे महबूब अब तो मेरी निगाहों को तेरी पेशानी पर सिर्फ़ बनजर ज़मीन दिखाई पड़ती है ।।