बार बार मेरा ख़ुदा मेरे सब्र का इम्तिहान लेता है
मैं हर बार उस पे भरोसा रख उसे चौंका देता हूँ
दोनों अपना अपना काम कर रहे हैं यारों
ना मैं उस पे भरोसा छोड़ता हूँ
ना वो मुझे आज़माना छोड़ता है
मै भी अपनी ज़िद पे अड़ा हूँ दोस्तों
कभी तो ख़ुदा भी मजबूर होगा
मुझे मेरा हक़ अता फ़रमाने के लिये ।।
