एक मुल्क को दो सरहदों में बाँट दिया,
जैसे एक माँ के सीने को ख़ंजर से काट दिया ,
मॉं के ज़ख़्म से रिसते लहू को देख,
दर्द तेरे सीने में भी दर्द मेरे सीने में भी,
अॉंख नम तेरी भी और मेरी भी,
आ कर ले अब तो दोस्ती हमसे,
ये दोस्ती ज़रूरत तेरी भी और मेरी भी ।