मैं और मेरे एहसास अक्सर काग़ज़ को स्याह कर ख़ुश हो लिया करते थे पर एक दिन ऐसा आया जब मैंने और मेरे एहसासों ने अपने सपनों में रंग भरते पाया और वो इस किताब की शक्ल में एक दिन सबके सामने आया।