वो गुज़रे ज़माने की बात हो गई
आज मैं औरत हो गई
जो कल तक किसी की माँ बहन थी
आज अचानक औरत हो गई
बड़ी इज़्ज़त थी साहब मेरी ज़माने में
बड़ी इज़्ज़त थी साहब मेरी ज़माने में
आज वो ही इज़्ज़त क़त्लेआम हो गई
क्यूँकि आज....
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई
कल तक एक बच्चा आता था
मुझे चाची कह कर जाता था
आज मुझे आइटम बुलाता है
उसकी शराफ़त निकल गई
क्यूँकि आज.....
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई
कल तक जिन बाँहों में
मैं चैन से झूली खेली थी
वो uncle
वो uncle आज मुझे सेक्सी कहते हैं
उनकी नियत भी बिगड़ गई
क्यूँकि आज......
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई
कल तक मेरे भतीजे का दोस्त आता था
मुझे बुआ जी कह मेरे पैर छू कर जाता था
आज मुझे माल बताता है
उसकी भी चाल बदल गई
क्यूँकि आज......
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई
जाऊँ कहाँ ज़माने में सिर छुपाने
अब तो ये बातें सरेआम हो गई
हर गली हर मोहल्ले में मैं बदनाम हो गई
अब तो मेरी आबरु शमशान हो गई
क्यूँकि आज..........
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई
क्यूँकि आज मैं औरत हो गई ।