तू मदमस्त समीर सी बहती चल
अल्हड़ समीर सी बहती चल
एक दिन ऐसा आयेगा सब ठाट धरा रह जायेगा
बस बेफ़िक्री का ये आलम तेरे साथ ही जायेगा
थकना नहीं तू किंचित भर
रुकना नहीं तू किंचित भर
बस मदमस्त समीर सी बहती चल
अल्हड़ समीर सी बहती चल
राह में कितने ही शूल मिलें
काँटे मिले या धूल मिले
तुझको नहीं है रुक जाना
पा कर लक्ष्य है दिखलाना
बस मदमस्त समीर सी बहती चल
अल्हड़ समीर सी बहती चल..........