ऐ लफ़्ज़ तू कहाँ से आता है.... आँख के मोतियों को बहा जाता है... ऐ लफ़्ज़ तू कहॉं से आता है.... कुछ रूह को छू जाता है.... कुछ ज़ेहन में बस जाता है.... कुछ निर्मम सा कर जाता है.....