कुछ इस तरह से जियूँ ऐ ख़ुदा, मैं अपनी ज़िन्दगी के मेरे जनाज़े पर हर आँख में आंसू हो, और जब भी ज़िक्र आये मेरा, तो अपने लबों पे ना क़ाबू हो।