मैं कौन हूँ ? मैं कोई भी हो सकती हूँ कल निर्भया थी आज आसिफ़ा हूँ कल शायद जेनिफर होंगी क्या फ़र्क पड़ता है मेरे नाम से आपको जब ज़हनियत में ही हैवानियत है आपकी तो क्या फ़र्क पड़ता है कि मैं कौन हूँ आपको तो सिर्फ मेरा जिस्म दिखेगा मेरी क्या उम्र है इससे आपका क्या वास्ता फिर क्या फ़र्क पड़ता है कि आपके नाम में राम है या अल्लाह आपकी तो ज़हनियत में हैवानियत का हल्ला यूँ ही बिखरेंगी जाने कितनी ही बेटियाँ बस इतना याद रखना के आज मैं थी कल आपकी भी हो सकती है क्यों अच्छा नहीं लगा ना मेरे पापा को भी नहीं लगा था पर ये सच है मुझे लूटने वाला आप जैसा ही कोई बाप भाई था इसलिए कहती हूँ के खुदा का ख़ौफ़ कर ऐ नादाँ इन्सान ना दबा हमें इतना कि कल हम बन जायें तेरे लिए क़हर का तुफान।