काश की तुम देख पाते
कि मैं सिर्फ फ्रॉक पहनती थी
काश की तुम सोच पाते
कि कल मेरी जगह
तुम्हारी बहन हो सकती है
काश की तुम्हें पता होता कि
गुड़ियों से खेलने की उम्र में
ये गन्दा दर्द कैसा लगता है
मैं नहीं हूँ वहाँ पर
जब भी यहाँ से तुम्हें देखती हूँ
तो तुम मेरे भाई जैसे दिखते हो
तुम्हारे पापा मुझे मेरे पापा जैसे लगते है
भाई और पापा ऐसे होते हैं
काश तुम समझ पाते
कि तुम्हारे हाथों ने
तब मेरे जिस्म को नोचा था
अब हर रोज़ वो हाथ मुझे
अपनी आत्मा पर महसूस होते हैं
जब मैं मम्मी से पूछती थी
कि पुलिस वाले कौन होते हैं
तो वो अक्सर कहा करती थीं
ये हमारी रक्षा करने वाले होते हैं
काश की मैं उनसे कह पाती
कि वो ग़लत सोचती हैं
छोड़ो ये बातें बेकार हैं
अब मेरे ऊपर सियासत होगी
वोटों की रोटियाँ सिक्केंगी
फिर सब मुझे भूल जायेंगे
मेरे मम्मी पापा यूँ ही तड़पते उम्र भर
मेरी यादों में आँसू बहायेंगे
अब यही सोचती हूँ
कि तुमने मुझे गन्दा ना किया होता
तो काश मैं कुछ और दिन
उस दुनियाँ में अपने सपने बुन पाती
गुड़ियों से खेल पाती
हाथों में मेहंदी लगा डोली चढ़ती
पर ये काश अब काश ही रहेगा।