डर लगता है हाँ डर लगता है
अब तो इस देश में
सच बोलने से डर लगता है
रिश्तों की घिनौनी तस्वीर देखी देश में
कि अब रिश्ते जोड़ने से डर लगता है
सच को बेपर्दा करने वालों की मौत देख के
सच के बेपर्दा होने से डर लगता है
कानून को कौड़ियों में बिकता देख के
कानून के ठेकेदारों से डर लगता है
कहते है सच की आवाज़ बुलन्द होती है
पर उसे दबा यहाँ झूठ लाखों में बिकता है
रक्त रंजित नेताओं के भाषणों से
डर लगता है सच कहूँ तो ऐ मनीषा
अब किसी की सच्ची आवाज़
और आज़ाद ख़्याल से भी डर लगता
हाँ डर लगता है अब तो इस देश में
सच बोलने से डर लगता है ।