वक़्त वक़्त की बात है साहब एक वो दौर था जब बेटियाँ  ही नहीं चूल्हे भी साँझे हुआ करते थे एक ये दौर है जब चूल्हे तो छोड़ो बेटियाँ भी साँझी नहीं रहीं मेरा देश बदल रहा है।