किसी ने ना देखा धरती आकाश को मिलते पर मिलने की कसक दोनों में काफ़ी है मैं और मेरा खुदा भी ना मिले कभी पर मिलने की आस हमेशा बाक़ी है तू क्या समझेगा हमारी मोहब्बत को जब तेरे अन्दर ना कोई एहसास बाक़ी है ।