फूल, खुशबू, बहार की कीमत,
अब मुझको समझ आ रही है।
जो बैठे हैं इंतजार में मेरे,
उनको देख, वो शर्मा रहे हैं।
खुश हूं तुझको पाकर मैं,
बतलाना ये चाह रहे हैं।
बिन बोले एक-दूसरे को पढ़ लेना
ऐसी भाषा अपना रहे हैं।
प्यार का एहसास है ऐसा,
तुझमें खोकर खुद को पा रहे हैं।
तेरी बाँहों में लिपटकर,
मेरे सारे ग़म घबरा रहे हैं|

