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DECEMBER


December, तुम चले जाओ सारा साल लेकर।मैं थक चुका हूँ ज़मीन पर आसमान लेकर।

बिखरे सपने, टूटी उम्मीदें, अरमान खंडहर हो गए।अब आने भी दो January को नया पैगाम लेकर |

— क़लमकार कर्ण
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