देखो, वो अपनी साख बचाने में लगा है,टूटे पत्ते को दरिया में बहाने चला है।सच से नज़रें चुराकर, असलियत दबाने की ख़ातिर,दिल के उठते शोर को भी दफ़नाने चला है।
देखो, वो अपनी साख बचाने में लगा है,टूटे पत्ते को दरिया में बहाने चला है।
सच से नज़रें चुराकर, असलियत दबाने की ख़ातिर,दिल के उठते शोर को भी दफ़नाने चला है।