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आरम्भ कर...


**“आरंभ कर तू खुद को जानकर,तभी पहुँच पाएगा आसमान पर।

खुद के ही हाथों खुद को तराश ले,आत्मसमर्पण से जीत को आसान कर।

विचलित न होना संघर्ष के जाल में,मुश्किलों से लड़कर खुद को बलवान कर।"**

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