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Akela


यहाँ अब कोई नहीं यहाँ अब अकेले ही चलना हैदरिया में बहकर पत्थरों के ऊपर ही तो चढ़ना है

क्यों किसी से उम्मीद रखकर ज़िंदगी में उलझु मैंमौत को गले लगाकर हमे अकेले ही तो जलना है

— मानस अक्षर
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