यहाँ अब कोई नहीं यहाँ अब अकेले ही चलना हैदरिया में बहकर पत्थरों के ऊपर ही तो चढ़ना हैक्यों किसी से उम्मीद रखकर ज़िंदगी में उलझु मैंमौत को गले लगाकर हमे अकेले ही तो जलना है
यहाँ अब कोई नहीं यहाँ अब अकेले ही चलना हैदरिया में बहकर पत्थरों के ऊपर ही तो चढ़ना है
क्यों किसी से उम्मीद रखकर ज़िंदगी में उलझु मैंमौत को गले लगाकर हमे अकेले ही तो जलना है