बिसरल प्यार के बोली भाषा
छूट गईल घर बार
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
खोजी दर दर ठोकर खा के
मिले ना अब घर बार
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
ध्यान ना आवे गांव मुहल्ला
बिसर गइले सब यार
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
बिन आचर के आंसू सुखल
ना केहू करे पुकार
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
छूट गइल सब रिश्ता नाता
बचल ना कौनो आश
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
फल अन्न के इक्छा छूटल
अब ना लागे पियास
अंखियां रास्ता रोज निहारे
सुन्ह भईल संसार
शीश झुका के रउवा से दानी
मांगे मानस हाथ पसार
ई कलयुग के दिनचर्या से
मुक्ति दी सरकार!


