मैं तो बस चलना चाहती थी !
बस आगे बढ़ना चाहती थी !!
हमारे तो कपड़े भी बड़े थे !
कभी चौराहे पर भी न खड़े थे!!
मेरा तो रंग भी काला था !
कानो मैं झुमिकी न बाला था !!
बालो में खूब तेल लसाये !
हम तो चले हमेशा नजरे झुकाये !!
कभी साइकल भी ना मांगी !
गांव की दहलीज़ भी न लागीं !!
मैं तो बस चलना चाहती थी !
बस आगे बढ़ना चाहती थी !!
मर्यादा मैं रही थी हमेशा ये तुम्हारी बिटिया !!
बताओ ना पप्पा मैं गलत थी या जिसने रेप किया उसकी सोच है घटिया !!
हा थोड़ा ज्यादा सोचा करती थी !
खुद मैं तुम को खोजा करती थी !!
बस मेरा तो यही थी सपना !
छोटा सा हो एक घर अपना !!
अम्मा कब तक लडक़ी झोकेगी !
छोटी पड़ने का कब सीचेगी !!
पप्पा तू कब तक कमायेगा !
क्या छोटा कभी शहर जायेगा !!
अम्मा को नई साड़ी तुझको कुर्ता था दिलाना !
बस यही सब तो पाना चाहती थी !
मैं तो बस पड़ना चाहती थी !
बस आगे बढ़ना चाहती थी !!
गांव की मर्यादा में रहकर गांव में ही आगे बढ़ना चाहती थी ये तुम्हारी बिटिया !!
बताओ ना पप्पा मैं गलत थी या जिसने रेप किया है उसकी सोच है घटिया !!
यही सब थी मेरी प्रीत !
पर कभी ना छोड़ी गांव की रीत !!
सूरज से पहले उठ जाती !
सेर से पहले शौच थी जाती !!
रोटी भी ना जलाया करती थी !
दाल भी खुब पकाया करती थी !!
अम्मा को बताकर जाती !
समय से पहले घर आ जाती !!
सबके आने पर चुप जाती !
कोने में थी मैं छुप जाती !!
बारिशओ में भी मैं कहा नहाती थी !
मेलो मे भी कहा जाती थी !!
मैं तो बस चलना चाहती थी !
बस आगे बढ़ना चाहती थी !!
ज्यादा बड़ी कहा थी मैं छोटी सी ही तो थी ये तुम्हारी बिटिया !!
बताओ ना पप्पा मैं गलत थी या जिसने रेप किया है उसकी सोच है घटिया !!
मैं कही ना देखा करती थी !
एक राह ही चला करती थी !!
पप्पा जब वो सामने आया !
अंधेरा बहुत घेरा छाया !!
पप्पा उसको बहुत समजाया !
मेने तो बहुत चिलाया !!
पर कोई न मुझे बचा पाया !!
पर वो तो था पूरा दरिंदा !
हवस के आगे वो था अंधा !!
पायल जो मेने थी बाँधी !!
टूट कर हो गयी थी आधी !!
शर्म से झुक गए थे पत्ते !
तन पर बचे थे अब कुछ लत्ते !!
बहुत रोई थी उस दिन पापा ये तुम्हारी बिटिया !!
बताओ ना पप्पा मैं गलत थी या जिसने रेप किया है उसकी सोच है घटिया !!
काले गोर का भेद नही शायद लड़की होना पाप है !
छोटे बड़े कपड़े का दोष नही बस लड़की होना अभिशाप है !!
ये वो जगह है पप्पा जहाँ तीन तीन दिन की बच्चीयों को दबोचआ जाता है !
उससे भी ज्यादा गलत है ये जो पाप छुपाया जाता है !!
शायद सही किया काका ने उसदिन धरती पर आने से पहले ही मार दिया !
तिल तिल करके मरती हर दिन उसका जीवन तार दिया!!
पंचायत ने क्या खूब फैसला सुनाया था!
उसके साथ बियाह रचाने का फरमान आया था !!
जिसने जीते जी मार दिया था उसके साथ न रह पाती !
तू ही पप्पा मैं झूठ के साथ कैसे जी पाती !!
पंचायत में सब बड़े थे !
चुप रहना तुझ से ही सिखा था !!
चुप रहना ही बस अब चाहती हू!
जिंदा रहकर तो शायद न कह पाती !!
इसलिए मरने से पहले सब कह जाती हु !
हर रास्ता अब दुश्मन लगता है !!
जीना अब मुश्किल लगता है।!
पप्पा अब ओर कुछ न कह सकेगी तुम्हारी ये बिटिया !!
बताओ ना पप्पा मैं गलत थी या जिसने रेप किया है उसकी सोच है घटिया !!

