बेशक़ सच्चाई की राह कठिन हैं,
पर मंज़िल भी कितनी सच्ची हैं|
पग पग बाधा को पार करते हैं,
ये सफ़र भी कितनी अच्छी हैं|
तन मन में नयी संचार भरती हैं,
झरणों की पुकार कितनी मधुर हैं|
नित नयी किरण निकलती हैं,
वो आभा भी कितनी अच्छी हैं|
अठखेलियाँ करती तितलियां भी,
कितना मनोरम मधु वो दृश्य हैं|


