मानों सब कुछ छूट गया हैं

एक पल में ही टूट गया हैं|

चाहा जिसको रब से ज्यादा

वही मुझसे रूठ गया हैं।


जिनके संग महफूज पाते थे

आज उनसे ही दूर हैं|

फासले भी बांधे हैं एक-दूजे से

जाने वो कौन-सी डोर हैं|


कोई बताएं कहते हैं जिसे मोहब्बत-

तड़प या सुकून हैं|

जिसे परवाह नहीं तनिक भी

दिल उनके नशे में चूर हैं।