#पहचान मेरी अब खो रही है।
भुलाय जानो मे गिनती हो रही है।।
#नाम था अब गुमनामी हिस्से आ रही है।
रोशनी मे चेहरे पे अंधेरों की स्याही आ रही है।
#महफ़िल मे कब से कोने मे बैठे है।
नजरअंदाज करके मेरी राह देखी जा रही है।
#जहां से अब बेदख़ल अब बेदख़ल है।
कहते हो अब तेरी याद आ रही है तेरी याद आ रही है।।


