#मुझे सुनने का तेरा एहतराम करता हूँ।वजह यही है खुदको सरेआम करता हूँ।#महफ़िल का तुम्हारी इंतेज़ार करता हूँ।चलो क़लम स्याही काग़ज का इंतजाम करता हूँ।#शायरी की खाली दुकान लगाता हूँ।खरीदार कोई नहीं इसलिए खुद को नीलाम करता हूँ।
#मुझे सुनने का तेरा एहतराम करता हूँ।वजह यही है खुदको सरेआम करता हूँ।
#महफ़िल का तुम्हारी इंतेज़ार करता हूँ।चलो क़लम स्याही काग़ज का इंतजाम करता हूँ।
#शायरी की खाली दुकान लगाता हूँ।खरीदार कोई नहीं इसलिए खुद को नीलाम करता हूँ।