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मशक्क़त


#मत कर मशक्क़त बेदख़ल।तेरे लिखा अब कोई नहीं समझता।।

#कई बार सोचा काश।अपनी किताबों को जला सकता।।

#करी बहुत कोशिश मग़र।अपने हाथ से अपना गला दबा नहीं सकता।।

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