#सोचता हूँ तो सोच हार जाती है।जब सोचता हूँ अब तुम नहीं हो।।#पहले अक़्सर आ जाया करती थी।अब ख़्वाबों मे भी नहीं आती हो।।#कर्ज़ा थी या एहसान या दोनों।दोनों सूरतों मे उतारी जाती हो।।
#सोचता हूँ तो सोच हार जाती है।जब सोचता हूँ अब तुम नहीं हो।।
#पहले अक़्सर आ जाया करती थी।अब ख़्वाबों मे भी नहीं आती हो।।
#कर्ज़ा थी या एहसान या दोनों।दोनों सूरतों मे उतारी जाती हो।।