#जान ही थी जान कब अपनी होती है।
नक़ाब रहने दो चेहरों से जलन होती है।।
#जिंदा रहने दो मरने के बाद मुझे।
कफ़न हटा दो मुझ से घुटन होती है।।


#जान ही थी जान कब अपनी होती है।
नक़ाब रहने दो चेहरों से जलन होती है।।
#जिंदा रहने दो मरने के बाद मुझे।
कफ़न हटा दो मुझ से घुटन होती है।।