#जाने मैं कब कहाँ ढह जाऊं।

मरम्मत की जररूत है दरार हो गए।।

# जब पीते थे शराब तो खराब न थे।

छोड़ दी शराब तो खराब हो गए।।

# थी जब उम्र अपनी हमारा जवाब न था।

अब उम्र जवाब दे गई बेकार हो गए।

# न था ग़म तो भरी थी महफ़िल अपनी।

आया ग़म तो जाने सब कहाँ हवा हो गए।।