#नहीं मिल रहे चश्मा और क़लम
रख के कहीं भूल जाता हूँ मै।
#अक्सर आवाज़ आती है यूँही
घर मे कोई है भूल जाता हूँ मै।
#पुकारते रहते हैं बेदख़ल
अपना नाम ही भूल जाता हूँ मै।
#...................हाँ तो मै कहाँ था
बता दो कहा था न भूल जाता हूँ मै।


#नहीं मिल रहे चश्मा और क़लम
रख के कहीं भूल जाता हूँ मै।
#अक्सर आवाज़ आती है यूँही
घर मे कोई है भूल जाता हूँ मै।
#पुकारते रहते हैं बेदख़ल
अपना नाम ही भूल जाता हूँ मै।
#...................हाँ तो मै कहाँ था
बता दो कहा था न भूल जाता हूँ मै।