तुम अच्छे बहुत हो मगर's image
Poetry1 min read

तुम अच्छे बहुत हो मगर

शैलेन्द्र रंगाशैलेन्द्र रंगा June 21, 2022
Share0 Bookmarks 10711 Reads1 Likes
तुम अच्छे बहुत हो मगर
अच्छाई का क्या।
छुपाके जो रखते हो
उस बुराई का क्या !
मैं लाख मना लूं
दिल को मगर
बीमारी जो बढ़ा दे
उस दवाई का क्या।
मोहब्बत मोहब्बत 
बड़ा करते हो !

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts