समन्दर भी
यूंही तो खारा नहीं है,
पता नहीं
किस नदी
के बिछड़ने पर
फूट फूट
के रोया होगा,
न मिली होगी
वो दोबारा
जिस प्यार को
उसने खोया होगा।
मिली भी होगी
तो अरसों बाद
कितनी गंदगी को
उसने ढोया होगा।
किसी ने मां कहा
किसी ने देवी
किसी ने लगा डुबकी
मुंह को अपने धोया होगा।
जब दोबारा मिली भी तो
लंबी उदासी और थकान ने
उसे झंझोड़ दिया फिर
आंसुओं ने उसने भिगोया होगा।