नहीं चाहिए
वो धर्म मुझे
जो तय करता है
किसके हाथ
में झाड़ू होगा,
किसके हाथ में
घंटी।
नहीं चाहिए वो धर्म
जो तय करता है
कौन करेगा पूजा,
और कौन
पैर में होगा।
नहीं चाहिए वो धर्म
जो हाथ में देता है
राम्बी।
चाहिए वो धर्म
जो बात करे
वैज्ञानिकता की,
मनुष्यता की,
न कि अस्पृश्यता की।