अजब सी दोस्त हैं किताबें।
गजब की दोस्त हैं किताबें।
भंडार है ज्ञान का,
कोई कितना भी बटोर ले।
कोई भेदभाव नहीं करती,
सिपाही ले या चोर ले।
दुनिया को छोड़ के जिसने,
किताबों से की दोस्ती।
स्वयं को उसने समझ लिया,
जिदंगी से की मस्ती।
किताब का जान
शब्दों में नहीं होता
भाव महत्वपूर्ण है
वो ही कविता पिरोता।
