मेरे बुरे दौर के साथी ही,

मेरे अच्छे समय के गवाह होंगे।

हारेंगे या जीतेंगे पता नहीं,

पर जीवन की सीधी राह होंगे।

मुफलिसी किसकी रही सदा,

ताज भी कब रहे हमेशा।

पेड़ भी फल कब तक देंगे,

कब तक फुल, कब तक रेशा।

चांद क्या तमन्ना तो हम,

सूरज की कर लें मगर।

चलना जब साथ दोस्तों के,

सीधी करली जीवन की डगर।