बेवजह खुश रहता हूँ तेरे
जाने के बाद।
वजह सारी तू ले गई 
करके मुझे बर्बाद ।
आहिस्ता आहिस्ता
जिंदगी कट रही है,
आहिस्ता आहिस्ता
ढूंढ छंट रही है,
के वो रास्ते थे
नम मेरे वास्ते थे।
के वो जो नज्मे थी
और वो जो गजलें थीं
न सुर था मैं
न ही ताल
बस वक्त का था सब कमाल।
घड़ी की सुइयां
किसी के साथ नही रहती
वो घूमती हैं अनवरत,
समय सम्मत
यथावत।
उसे न किसी से मतलब है
न ही शिकवा।
मैं भी वक़्त के साथ 
चल पड़ा हूँ।
रुक गए तो
ठहरे हुए पानी
के जैसे हो जाएंगे।
बहता हुआ पानी
ताजा,साफ और गतिशील
रहता है।