बारिश की बूंदजब जब नाचतीधरा पर,राग जीवन पर।क्या मानवक्या पशु, पक्षीधरती की हरकायनात मुस्कुरा करकरती स्वागतजीवन का।बारिश एहसासकराती गति, प्रगतिखुशी, जीवन का।बारिश न होतो जीवन नीरस, बेजानऔर बेकार होजायेगा।