दिल के बाज़ार में जब हम टकरा गए उनसे, तो नज़र पड़ी एक दिल पे जो उनकी बाहों में था, रंग न था कोई उसपे, खाली था, स्याह था, पूछ लिया हमने भी कि कितने में खरीदा, तो जवाब में मालूम हुआ कि ये तो उनका ही दिल था, जिसकी तब्दीली कराने वो आये थे, शायद रंग भरने उस स्याह दिल में....