।। मेरी राहे तरसती रहे ।।'s image
Love PoetryPoetry1 min read

।। मेरी राहे तरसती रहे ।।

mahiram901mahiram901 November 14, 2022
Share1 Bookmarks 63136 Reads1 Likes

मैं राहे अपनी सजाता रहा ,

उनकी राहे थी हजार ।

ये धोखा नहीं दिल की तसल्ली मात्र थी बस बोल देते एक बार ।

हम ही रास्ता बदल लेते ,

प्रियतम को नहीं देते

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts