(✷✷मेरा ख़ुदा✷✷)
,,,,,,,,जब भी मेरे ख़ुदा का......
,,,,,,,,बुलावा मेरे लिए आएगा......!
,,,,,,,,मेरी शिकायतों का पिटारा......
,,,,,,,,मेरे सँग- सँग जाएगा......!!
,,,,,,,,करेंगे शिकायत सबकी......
,,,,,,,,जो भी हमें सताएगा......!
,,,,,,,,वो मेरा ख़ुदा है......
,,,,,,,,इंसाफ़ ज़रूर दिलाएगा......!!
,,,,,,,,हम करेंगे अर्जियां ख़ुदा से.....
,,,,,,,,वो एक अलग दुनिया बनाएगा......!
,,,,,,,,जिसमें सिर्फ़ और सिर्फ़ बसेरा.....
,,,,,,,,,नर्म दिल लोगों का ही करवाएगा......!!
,,,,,,,,,मेरा ख़ुदा एक ऐसी.....
,,,,,,,,,अलग दुनियाँ बनाएगा......!
,,,,,,,,,जहाँ इश्क़ ही इश्क़ हो.....
,,,,,,,,,,कोई नफ़रत नहीं कर पाएगा.....!!
,,,,,,,,,इश्क़ हो बस रूह से.....
,,,,,,,,,जिस्मों से खेला नहीं जाएगा......!
,,,,,,,,,बातें हो मोहब्बत की......
,,,,,,,,,कोई अश्लीलता नहीं लाएगा.....!!
,,,,,,,,,बेशक होंगी गालियाँ.....
,,,,,,,,,माँ- बहन का नाम नहीं आएगा......!
,,,,,,,,,नजाकत होगी नज़रों में......
,,,,,,,,,कोई हैवानियत नहीं दिखाएगा......!!
,,,,,,,,,जो करे रूह को तार- तार......
,,,,,,,,,वो बलात्कारी नहीं बच पाएगा......!
,,,,,,,,,जो दिला ना सके इन्साफ़......
,,,,,,,,,वो तराजू नहीं कहलाएगा......!!
,,,,,,,,,जिस्मों का प्यासा.....
,,,,,,,,,कोई मर्द नहीं बन पाएगा.....!
,,,,,,,,,जो बोले औरत को वैश्या......
,,,,,,,,वो मर्द नहीं कहलाएगा.....!!
,,,,,,,,,मरहम ना हो जिसका.....
,,,,,,,,,वो दर्द नहीं मिल पाएगा......!
,,,,,,,,,पायाब हो हर ज़ख्म......
,,,,,,,,,ऐसा दवाखाना वो बनाएगा......!!
,,,,,,,,,माहिरा का ख़ुदा.....
,,,,,,,,,उसका बचपन फ़िर लौटाएगा.....!
,,,,,,,,,माहिरा की मासूमियत को.....
,,,,,,,,,बड़े प्यार से अपनाएगा......!!
(✷✷माहिरा चौधरी✷✷)


