सलीक़े से, हवाओं में,यूं ख़ुशबू सी, घोल देते हैं...अभी भी, कुछ लोग, बाक़ी हैं जो;मुश्किलों में भी, मीठा बोल लेते हैं...
सलीक़े से, हवाओं में,यूं ख़ुशबू सी, घोल देते हैं...
अभी भी, कुछ लोग, बाक़ी हैं जो;
मुश्किलों में भी, मीठा बोल लेते हैं...