तू छा जाना...


पर्वत का शिखर बनके

नदियों में नीर बनके

तारों की चमक बनके

सूरज का प्रखर बनके 

तू छा जाना, तू छा जाना।


गीतों में राग बनके

धुन कोई नयी बनके

ज्वलंत आग बनके

तू ही  पराग बनके

तू छा जाना, तू छा जाना।


धावकों में उसेन बनके

अभिनेता बच्चन बनके

यूनिवर्स की सेन बनके

दुनिया को देन बनके

तू छा जाना, तू छा जाना।

जीत कर सारा जहां

तू छा जाना...!!!


_महिमा ठाकुर