यूँ ना मुझे तड़पाओं,
थोड़ा करीब तो आओं।
इन यादों में, इन वादों में,
मुझे ना यूँ सताओं।

ये तेरा लहराता आँचल,
ये तेरी आँखों का काजल।
उड़ती रेशमी जुल्फों से,
मुझे ना यूँ बहलाओं।

किसी से ना ये कभी कहना,
तुम हो मेरा अधूरा सपना।
तुमसे ही है दुनिया मेरी,
मुझे ना यूँ आजमाओं।

मांगी है खुदा से मैंने वो,
मेरी हो तुम प्यारी इबादत।
तुमसे ही है मेरी खुशियांँ,
मुझे ना यूंँ भुलाओंं।

कविराज :- डाॅ. महेश®बालपांडे, तुमसर
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