चलो हम दोनों अजनबी बनकर,
चलेंगे आज साथ मिलकर।
कुछ-कुछ तुम भी कहना,
कुछ-कुछ मैं भी कहूंगा।
रास्ते बड़े कठिन है यारा,
पर ये सफर सुहाना होगा।
अगर तू मेरी दीवानी बनेगी,
और मैं तेरा दीवाना बनुंगा।
जमाने की बात मत पूछो,
ये है यारा संगदिल जमाना।
इसने राधा-कृष्ण ना जाना,
माँ सीता को भी दिया ताना।
कश्तियाँ अक्सर है डूबती,
किनारो पर ही हमेशा आकर।
हम ऐसा प्यार का सागर बनेंगे,
जहांँ सब एक होते मिलकर।
कविराज :- डाॅ. महेश®बालपांडे, तुमसर
☎️ 7875135787

