
यूँ तो कई मर्तबा सुना हूँ...ये "हाँ " शब्द..
पर तुम से...कभी नहीँ..
क्यू इतना बड़ा होता है ,ये हाँ शब्द...इसे और छोटा होना चाहिये..
और थोड़ा सरल भी....ताकि बोलते बोलते रुकने की गुंजाइश न रहे...
बहूत मुशीबत में डाल देता है..
ये "हाँ " कभी..कभी..
बगैर कुछ कहे...र
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