तुम्हारा ख़याल मेरी सुबह के चाय जैसी है ..
रोज़ आ जाती है ..अपनी मिठास लिये ..
और मुझे फ़िर से तरोताजा कर देती है ..रोज़ की तरह ..
कभी कभी मै ..इतना आलसी हो जाता हूँ
की ..खयालों के कप भी नहीं सम्हाल पाता ..
और वो मेरे जहन के होठों से छिटक कर ..
सीने के दिल में ..फैल जाती है ..
ऐसा अक्सर होता है ..
और दिल में तुम्हारे खयालों का दाग भी लग जाता है ..
दाग मिटाने की कोशिश भी करता हूँ ..तो
और फैल जाती है ..
सच में ..और फैल जाती है ..
अब मानने लग गया हूँ ..ये खयालों का दाग कभी नहीं जायेगा ..
कभी नहीं जायेगा ..