जब कभी आती है बात जायदाद की तो... मै इकट्ठी की हुई तुम्हारी ...तश्वीरें देखता हूँ ... पाने को तुम्हे जब कभी मचलता है दिल ... बाँधने को इसे अक्सर ...ज़ंजीरें देखता हूँ ... जलता नहीं ,जब कोई और बात करे तुमसे ... मै तो बस उसकी और मेरी... तकदीरें देखता हूँ ... जब कभी इतेफाक से मेरी बात हो तुमसे... खुश होकर हाँथो की अपनी...लकीरें देखता हूँ ... कहीं सुना था माँगने से वहाँ सबकुछ मिलता है ... यही सोच कर तुम्हे माँगने को ...मंदिरें देखता हूँ ...