ऊँगलियों ने कई बार ..तुम्हारा नम्बर डायल किया .. मगर अँगूठे ने ..मेरे दिल की सुन ..उसे कई बार काट दिया .. तुम से... ज्यादा बातें मैंने ..तुम्हारे उन आँखों से की है .. अब भी तुम्हारी आँखों को ..तुम्हारी DP में देख लिया करता हूँ .. पिछले कुछ दिनों से ..मोबाइल साइलेंट करके रखा हुवा है .. हर दो मिनट में उसे देखता हूँ ..शायद तुम्हारा काल आ जाये .. इन सब बातों को.. मै बस लिख सकता हूँ ..तुमसे कह नही सकता .. जानता हूँ ..तुम कभी इसे पढ़ नहीँ पाओगी .. मैसेज करना भी चाहता हूँ ..पर की-बोर्ड पर उँगलियाँ सही से काम नहीँ करती ... और ना ही ..कुछ लिखने को कहती हैं .. ऐसा लगता है ..जैसे कँहि खो.. सा गया हूँ ... पहली बार ..जब तुम्हे देखा .. सोचा ..रोक लूँ .. कैलेंडर की ..इन तारीख को .. घड़ी के ..उन सुईयों को .. मन के ..इस कम्पन को ... ताकी हो सबूत ..खुद को समझा पाने का .. की सच में ..तुम्हे देखा था .. रात भर आँखो की पलकें ..तुम्हारे ख्वाब बुनती हैं .. इनकी खिटपिट से परेशां ..नींद अब देर से आया करती है .. कानों में लगाया हुवा इयरफोन .. वाल्यूम अपने आखिरी लेवल पर .. फ़िर भी तुम ..मेरे यादों में उमड़ती हो .. सब से परे ..सब की सोच से परे .. जिसको सिवा मेरे ..कोई नहीं जानता .. ..कोई नहीं जानता .. जब भी तुम्हे लिखता हूँ .. तुम कम नहीँ होती .. शब्द और कागज कम पड़ जाते हैं .. तुम्हारे अगल-बगल ..कभी खुद को भी ..लिखने का मन करता है .. पर छोड़ो ..मै अपने के बारे में लिखूंगा क्या ?? मेरे पास बताने को है ही ..क्या ..?? बस ये कविता है .. और ये कविता है ..तुम्हारे लिये ... #different_dhruw